रतलाम स्थापना दिवस पर रतलाम की उपेक्षा उत्सव के नाम पर लाखों रुपए खर्च करने वाले एतिहासिक राजमहल पर चूप क्यों

रतलाम स्थापना दिवस पर रतलाम की उपेक्षा
उत्सव के नाम पर लाखों रुपए खर्च करने वाले एतिहासिक राजमहल पर चूप क्यों ?
रतलाम। बसंत पंचमी पर रतलाम अपना स्थापना दिवस मना रहा है। रतलाम स्थापना उत्सव समिति प्रतिवर्ष स्थापना दिवस के नाम पर हजारों रुपए खर्च कर महाराजा रतनसिंह को माल्यार्पण कर रतलाम के गौरवशाली इतिहास को सालभर के लिए बुला बेठती है। रतलाम स्थापना दिवस की दुकान केवल एक ही दिन खोली जाती है, जिसमें कांग्रेस व भाजपा दोनों के नेता व कार्यकर्ता मिलजुलकर स्थापना दिवस के नाम पर रतलाम के गौरवशाली इतिहास का मजाक बनाते है।
आज से तीन सौ साल पूर्व रतलाम शहर की स्थापना महाराजा रतनसिंहने की थी तथा तत्कालिन महाराजाओं ने रतलाम के विकास के लिए कई योजनाएं बनाकर निर्माण कार्य किए थे, वे आज भी उपयोगी साबित हो रहे है, जिसमें पुराना कलेक्टोरेट भवन और गुलाब चक्कर, झाली तालाब, अमृत सागर तालाब, रत्नेश्वर , त्रिपुलिया गेट आदि स्थापित कला के लिए जाने जाते है, इसी प्रकार रतलाम का राजमहल की वास्तुकला अपने आप में अनोखी है। समय के थपोड़ों ने इस राजमहल को आज जर्जरीत कर दिया है। भूमाफियाओं ने सारे राजमहल के आसपास की जमीने विक्रय कर इस राजमहल को एक खण्डहर के रुप में बदलने को प्रमुख भूमिका का निर्वाह किया है।
रतलाम की सामाजिक संस्थाओं और मीडिया ने भी कई बार राजमहल अधिग्रहण की मांग कर धरना भी दिया है, लेकिन नेताओं के कानों पर जूं नहीं रेंगी और उन्होंने इंदौर की तर्ज पर रतलाम के राजवाड़े को अधिग्रहण करने के लिए किसी प्रकार की कोई आवाज विधानसभा, लोकसभा में बुलंद नहीं की, जिसका परिणाम यह हुआ कि रतलाम का गौरवशाली राजमहल और घण्टाघर कई जगह से क्षतिग्रस्त होकर इस राजमहल पर कई प्रकार के पेड़ लगने से राजमहल की दीवाले व राजमहल का भवन जर्जर होने लगा है। ब्यूरो रिपोर्ट राकेश शर्मा मामा मोटर

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