DNA24X7NEWS,माइक्रो फाईनेंस कंपनियों के जाल में फंस कर कंगाल हो रहे गरीब ग्रामीण

माइक्रो फाईनेंस कंपनियों के जाल में फंस कर कंगाल हो रहे गरीब ग्रामीण
आरबीआई के नियमो के विपरीत वसूला जा रहा मनमाना ब्याज
भारत सरकार के कैषलेस अभियान को ठेंगा दिखाकर, लाखों का कैष भुगतान
पन्ना। जिले में संचालित माइक्रो फाइनेंस कंपनियां भारत सरकार के कैशलेस अभियान की धज्जियां उड़ा कर लाखों का नगद कैश लेन-देन कर रही हैं। साथ ही ग्रामीण इलाकों में आरबीआई के नियमों के विपरीत मनमाने ब्याज में लोन बांट रही हैं। पन्ना जिले में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का मकड़जाल तेजी से पैर पसार रहा है। भारत सरकार के कैसलेश अभियान के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। एक तरफ सरकार नियमों में संशोधन करते हुए बड़े नोटों पर पाबंदी लगा कर कैश लेनदेन कर डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दे रही है, कैशलेस के लिए प्रशासनिक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है, परंतु माइक्रो फाइनेंस कंपनियां इसे ठेंगा दिखते हुए नियम विपरीत कार्य कर रही हैं। बड़ी बात यह है कि केवल एक कंपनी का नहीं बल्कि जिले में संचालित ऐसी हर कंपनी का यही हाल है।
लाखो का नगद कैष लेनदेन- इनके एजेंट गांव-गांव पहुंच कर ग्रामीणों को आकर्षण स्कीम और डोर टू डोर सुविधा का झांसा देकर अपने जाल में फंसाते हैं, महिलाओं की बैठक लेने के बाद 5 से दस महिलाओं के समूह को डिमांड अनुसार लोन देते हैं। इसके बाद हर सप्ताह 26 से 28 प्रतिषत ब्याज राशि जोड़कर मूलधन के साथ सभी सदस्यों से रुपयों की वसूली की जाती है। इनके द्वारा हर सप्ताह 50 से 80 लाख रुपए से अधिक कैश लोन के नाम पर बांटा जाता है। महीने में इनका लेन-देन करोड़ों के पार पहुंच रहा है। ईसाफ और ग्रामीण कोटा, पहले नंबर पर हैं जो हर महीने करड़ों रुपए बांटती और वसूलती हैं। इसी प्रकार फ्यूजन, बंधन, स्पंदन, सोनाटा सहित दर्जनों कंपनियां लाखो का लेनदेन कर रही हैं। यह कंपनियां खुद को बैंक बताते हुए गांव गांव अपना कारोबार फैला रही हैं। ग्रामीण कोटा और ईसाफ के पास जिले में लगभग 5 हजार से अधिक कस्टमर अकेले पन्ना जिले में बताए जा रहे हैं। इसके अलावा फ्यूजन, वंदन, बंधन जैसी कम्पनियां भी करोड़ो का व्यवसाय कर रही हैं। नियम विपरीत कारोबार करने वाली कम्पनियों पर पुलिस व प्रशासन भी जांच नही कर रहा है।
जाल में फंस कर हुए बर्वाद, खून बेचकर चुकाई किस्तें – लोन के नाम पर ग्रामीणों को खुलेआम लूटा जा रहा है, आरबीआई की गाइडलाइन में ब्याज दर 10 फीसदी से कम है, जबकि ये 26 से 28 प्रतिषत तक ब्याज वसूल रही हैं, माइक्रो फाइनेंस कंपनी गोलमाल ब्याज बताकर ग्रामीणों को ठग रही हैं। जिला मुख्यालय से लगे ग्रामीण ईलाकों के कई परिवार इनके लुभावने आॅफर के जाल में फंस कर बर्वाद हो चुके हैं इसकी लत औ जाल इतना खतरनाक साबित हो रहा है कि लोग किसी तरह इनके जाल से निकलना चाहते हैं परंतु निकल नहीं पाते इनके द्वारा समूह की महिलाओं से ही मजबूर परिवारों को धमकियां दिलवाई जाती है। लोग टीव्ही और कूलर जैसे ग्रहस्ती का सामान खरीदने के चक्कर में इनके जाल में फंस जाते है और फिर उनके घर जमीन तक बिकने की नौबत आ जाती है। कुछ युवकों द्वारा खून बेंचकर किस्ते चुकाने की भी जानकारी मिली है। परंतु वह मीडिया के सामने बताने में घबरा रहे हैं।

पन्ना से मोहम्मद आज़ाद की रिपोर्ट

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